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Power of Compounding चक्रवृद्धि

Mystery No 1 Power of Compounding in Investing निवेश का असली जादू चक्रवृद्धि

आइये आज आपसे निवेश के असली जादू चक्रवृद्धि Power of compounding के बारे में बात करेंगे….

चक्रवृद्धि Power of compounding का परिचय

भारतीय लोगो में जो नए लोग है, जिनकी आयु अभी 25 से 30 या 35 साल तक की है । उनकी आर्थिक स्थति उन लोगो की तुलना में कमजोर है जो अभी 60 या 65 साल के है (जब ये 25 से 30 या 35 साल के थे तब की तुलना में) | जब कि आज के समय में आय में वृद्धि हुई है | इसके कई कारण है जैसे– जीवन का ऊँचा स्तर, महँगी कार, हफ्ते के अंत में बाहर खाना खाना या मल्टीप्लेक्स में सपरिवार मूवी देखना, और भी न जाने छोटे – बड़े कितने कारण होंगे |

हम अपने जीवन की आपा–धापी में पैसे के संचय को कहीं भूल सा गए है । जीवन की किसी भी समस्या में जब हमें पैसे की जरूरत पड़ती है तो बाजार में मौजूद वित्तीय संस्थान हमें लोन देने की लिए लाइन लगा के खड़े रहते है । हम उनसे लोन लेकर अपनी जरूरत पूरी करते है । तब शायद हमारा ध्यान इस तरफ जाता ही नहीं है कि हमने कितना लोन लिया है और उस पर हमने ब्याज भी दिया है,….. हम यही सोच कर खुश रहते है कि जरूरत के समय हमें लोन मिल गया और हमारा काम हो गया |

इस सब के बीच हम पैसे से सम्बंधित जो एक बात भूल जाते है वो है “चक्रवृद्धि की ताकत” | अगर आप चक्रवर्ती की इस ताकत को अच्छे से समझ लेंगे तो न केवल आपको कम पैसे का निवेश करके ज्यादा पैसे जरूरत के वक्त उपलब्ध हो सकेंगे बल्कि आपको लोन लेने जैसी नकारात्मक जरूरतों से भी बचेंगे, और लोन में ब्याज से चुकाए जाने वाले पैसों की बचत भी होगी। ये पैसे के बचत की एक ऐसी बात / आदत है जिसे समझ लिया तो आप स्वंय को ठगा महसूस करेंगे | आइये इसे एक कहानी से समझने की कोशिश करते है …

Power of compounding चक्रवृद्धि का जादू समझने के लिए कहानी

Power of Compounding

एक समय की बात है | एक राज्य में एक सम्पन्न ब्राह्मण रहता था जो अपनी आजीविका के लिए कुछ कारोबार करता था | इस राज्य का राजा बहुत ही घमंडी / सनकी था और हर छोटी-बड़ी बात पर अपने राज्य के खजाने से अनाप-शनाप धन खर्च करता रहता था, जब भी राजा को धन की जरूरत होती तो वो राज्य के व्यापारियों से धन उधर ले लेता और फिर इसे चुकाने के लिए प्रजा पर एक नया टैक्स लगा देता, इस कारण इस राज्य की प्रजा बड़ी त्रस्त थी ।

ये ब्राह्मण चक्रवृद्धि Power of compounding को जनता और समझता थे इसलिए राजा की इस आदत से बड़ा चिंतित रहता था | एक बार राजा ने राज्य में घोषणा करवा दी कि जो कोई भी मुझे शतरंज में हरा देगा मै उसे मूहँ माँगा इनाम दूंगा…..

इस ब्राह्मण ने राजा की इस चुनौती को स्वीकार कर लिया और मुकाबले के लिए एक दिन निश्चित हुआ | आस-पास के राज्यों से इसके लिए जज बुलवाए गए | नियत दिन शतरंज की बिसात बिछी और एक तरफ राजा ने गद्दी सम्हाली और दूसरी तरफ ब्राह्मण था | दोनों ने कई जानकारों की निगरानी में खेल शुरू किया, दोपहर ढलने तक फैसला हो ही गया, और इसमें घमंडी राजा की हार हुई |

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कितना पैसा लगेगा

राजा अपने राज कोष के घमंड में चूर था | राजा ने शर्त के अनुसार ब्राह्मण को इनाम मांगने के लिए कहा | ब्राह्मण ने कहा “राजन चूंकि मैंने आपको शतरंज में हराया है इस लिए मैं अपना इनाम भी शतरंज पर ही लूँगा” ….. राजा ने इजाजत दे दी ।

ब्राह्मण ने कहा “राजन शतरंज के पहिले खाने में गेहूँ का एक दाना रख दे और दूसरे खाने में पहिले का दुगना यानि कि 2 दाने, तीसरे खाने में दूसरे खाने के 2 दानो का दुगना यानि की चार दाने, चौथे खाने में तीसरे खाने के चार दानो का दोगुना यानि कि आठ दाने रख दे,.. बस इसी तरह पूरी शतरंज भर दीजिये |”

राजा ने अहंकार से अपने मंत्री को कहा “मंत्री इस ब्राह्मण को इसका इनाम दे दिया जाये |” मुश्किल तो तब आई जब सात दिन बाद मंत्री राजा के पास आकर बोला “ राजन ब्राह्मण को उसका इनाम देने के लिए हमे गेंहू के 9223372036854780000 दाने देने होंगे, “तो दे दो न” राजा ने बोला ।

गुस्ताखी माफ़ हो राजन अगर ये माना जाये कि एक किलो गेहूँ में 25000 दाने भी मने जाये तो 368934881474191 किलो गेंहू देना होगा । यानि कि 368934881474.191 टन, यानि कि 36893.49 मिलियन टन, और ये मात्रा आज के, पूरे भारत के गेहूं के लगभग 134.14 साल के गेहू की सारी पैदावार के बराबर होती है जो इस इस इनाम को चुकाने में चली जाएगी । जो हमारे नियंत्रण से परे है | “तो ऐसा करो कि इसकी जितनी कीमत होती है उतने पैसे खजाने से दे दो”, घमंड से चूर राजा ने कहा |

 ये कहानी भारत के एक छोटे राज्य की थी वो भी बहुत साल पहिले की भारत की, 2019 की अर्थव्यवस्था लगभग 2.3 ट्रिलियन $ की है यानि कि अगर गेंहू की इतनी बड़ी मात्र को 3.25 रु प्रति किलो के हिसाब से रुपये में बदला जाये तो इसकी कीमत 1199038364791120 रुपये होगी और ये आज के भारत के 7.55 साल की अर्थ व्यवस्था के बराबर होगा |

राजा ने ब्राह्मण को उसकी धनराशि देने में असमर्थता जताई तो ब्राह्मण ने इसके लिए राजा से एक वचन लिया कि वो राज्य कोष का प्रबंधन उसके अनुसार ही करेगा | और अंत में ये राज्य ही सोने की चिड़िया बना |

तो देखा आपने जो बात इतनी सरल सी लग रही थी …… कितनी मुश्किल थी | यही है पॉवरऑफ़ कॉमपाउन्डिंग ….

निष्कर्ष

ये है चक्रवृद्धि Power of compounding का जादू हमारी समझ से परे…..

अपने पैसे बचाइये और इनका उचित निवेश करिए…..

इस भूल को अपने पास कभी मत आने दीजियेगा ……

चक्रवृद्धि Power of compounding को कभी कम करके मत आंकिए ।

कृपया अपनी प्रतिक्रिया कमेंट के रूप में जरूर दीजिये…..

(2017-18 में भारत का सकल गेहूं का उत्पादन के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करिए  ये  275 मिलियन टन था |

भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करिए 

 

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