विषयसूची / Table of Contents
Must Avoid 14 Investment Myths 14 निवेश मिथकों जिनसे बचना चाहिए
Investment Myths निवेश मिथक का परिचय
आप जब भी किसी भी निवेशक से पूछेंगे कि आप निवेश करते सैमी किसी अन्धविश्वास मिथक पर भरोसा करते है? तो उसका जवाब होता है कि नहीं …. पर जब आप इसी व्यक्ति को कोई निवेश बतात्ते है तो इसका उत्तर कुछ और ही कहता है | इसी व्यक्ति के उत्तर से किसी न किसी मिथक की महक दिखती है |
निवेश मिथक क्या है ?
मिथक का मतलब है कि वो जो आप मानते है पर वो होता नहीं है | तो जब ये होता ही नहीं है तो फिर आप इस पर विस्वास कैसे करने लगते है ? कभी-कभी ऐसा इसलिए होता है क्योकि आपने किसी से ऐसा सुना होगा (देखा नहीं है ) और ये भी नहीं पता कि बायीं गयी बात सच भी है कि नहीं पर चूंकि सुना है (अपुष्ट ही सही) इसलिए मानने लगे |
मिथकों के प्रकार
वैसे तो जिन मिथकों (भ्रमों) के बारे में हम बात कर रहे है उनका वर्गीकरण करना आसान नही है । फिर भी हम इन मिथकों को तीन अलग-अलग बास्केट में बांटने का प्रयास करेंगे । ये निम्न प्रकार है :-
1) मनोवैज्ञानिक Psychological प्रकार के मिथक
किसी व्यक्ति ने आपसे अपना अनुभव साझा किया (जो पूरा सही या पूरा गलत या आंशिक सही या गलत भी हो सकता है) और आपने उसके आधार पर अपनी एक अवधरणा बना ली । अब ऐसा कुछ आपके साथ तो हुआ नही है और न ही आपका कोई ऐसा अनुभव है , पर फहिर भी आपने इस विषय पर एक अवधारणा बना ली जो आपके आगे के फैसलों को प्रभावित करता है । इसे ही मनोवैज्ञानिक Psychological मिथक कहते है ।
2) हिस्टोरिकल Historical मिथक
इस प्रकार में एक अलग तरह के वाकये आते है । इस कैटेगिरी में इतिहास में हुई घटना को सिर्फ इस लिए बताया जाता है ताकि वो स्मरण रहे और अगली संतति तक पहुंच जाए । पर इसका जो स्वरूप बताया जाता है वो भविष्य मे फिर से होगा इसकी सम्भावना बहुत ही का होती है। या ये का ले कि ना के बराबर होती है । जब आप इस तरह की बातों के आधार पर कोई फैसला लेते है तो वो इस श्रेणी में आता है ।
3) इटियोलॉजीकल aetiological Myth
ये मिथक का वो प्रकार है जिसमें बताने वाला व्यक्ति ऐसा क्यों हुआ होगा के बारे में अपने अनुभव से बता रहा होता है, जिसमे बताने वाला व्यक्ति अपने तर्कों (जो वास्तिविकता नहीं होती) का सहारा ले रहा होता है । जब भी आप इस प्रकार के मिथकों के आधार पर कोई फैसला लेते है तो उसे हम इटियोलॉजीकल मिथक के रूप में वर्गीकृत कर सकते है ।

भारत मे जो मिथक आपको सबसे ज्यादा देखने को मिलते है अब इनको एक-एक करके समझते है :-
निवेश मिथक NAV गिरने की प्रतीक्षा या नए फण्ड की प्रतीक्षा
कुछ लोग निवेश के बारे में बहुत ही बारीकी से विश्लेषण करते है, और जरा जरा सी बात पर निवेश करने से रुक जाते है | ऐसी ही एक बात है कि अभी फण्ड कि NAV ज्कयादा है कम होने पर निवेश करेंगे | निवेश का पहला नियम ही है लम्बे समय के लिए निवेश करना | लम्बी अवधि में 1 या 2% से कोई फर्क नहीं पड़ता |
हाँ फर्क ये जरूर है कि आप निवेश का अवसर चूक जायेंगे, और इसकी कीमत निवेशक को चुकानी पड़ती है वो भी जीवन भर के लिए | यही बात नए फण्ड के लिए लागू होती है | हम किसी भी फण्ड पर रिटर्न की कैलकुलेशन % प्रतिशत के रूप में करते है न कि कितने रु बढे |
निवेश मिथक यूलिप भी तो निवेश ही है
आप सही कह रहे है कि ULIP में निवेश भी तो निवेश ही है | ULIP आपको निवेश और बीमा दोनो को एक ही साथ देता है | देखने में ये अच्छा लगता है पर ….. बीमा और निवेश को अलग-अलग ही रखना बेहतर होता है | ULIP में दो बात जो मुझे ठीक नहीं लगती वो ये है पहिला इसमें खर्चो को चार्ज (वसूल) करने के लिए आपके यूनिट को कम करके (रिडीम) करके किया जाता है |
इस बजह से आपने पूरे पालिसी टर्म में जितने भी यूनिट खरीदे है, परिपक्वता या सरेंडर पर आपको उससे कम यूनिट का ही भुगतान होगा |
दूसरा ULIP में निवेश का झोखिम आपका (निवेशक) का ही होता है | इसका मतलब ये हुआ कि परिपक्वता पर मिलने वाली धनराशि कि कोई गारंटी नहीं होती | मिलने वाली राशि आपकी निवेश राशि से कम या ज्यादा हो सकती है ये कितनी कम या ज्यादा होगी ये बाज़ार पर निर्भर करेगा |
निवेश मिथक शेयर बाजार केवल पैसे वालो के लिए है
बहुत सारे निवेशक ये मानते है कि शेयर बाज़ार में रिटर्न तो बहुत मिलता है पर इसमें निवेश के लिए बहुत पैसा चाहिए होता है | ये बात सही नहीं है | आप शेयर बाज़ार में कम राशि से भी निवेश शुरू कर सकते है | तकनीकी के विकास से अब ये संभव हो गया है कि अब आप केवल एक शेयर भी खरीद बेच सकते है |
हाँ ये बात जरूर है कि शेयर बाज़ार में निवेश काफी जोखिमपूर्ण होता है, इस लिए निवेश के पहिले इस जोखिम को समझना और इसके आंकलन के बिना निवेश न करें | हाँ शेयर बाज़ार में आप किसी भी निवेश का एक शेयर भी खरीद सकते है |
निवेश मिथक शेयर बाजार के जोखिम से बचे रहिये
निवेश के लिए शेयर बाज़ार एक बहुत ही बेहतर लेकिन जोखिमपूर्ण होता है | तो क्या शेयर बाज़ार के जोखिम से बचना चाहिए ? शायद ये सवाल ही गलत है | सही सवाल ये है कि हम शेयर बाज़ार के जोखिम से बच सकते है ? और अगर हाँ तो कैसे ?
शेयर बाज़ार के जैसा रिटर्न कहीं और शायद ही मिलता हो | BSE सेंसेक्स जब से बना है तब से अब तक सालाना लगभग 16 % का रिटर्न आया है | और ये रिटर्न सारे उतार चढाव के बाद है |
अगर आप BSE में निवेश करना चाहते है तो आप म्यूच्यूअल फंड में इंडेक्स फण्ड को चुन सकते है |
निवेश मिथक 25 की उम्र में रिटायरमेंट की सोचना उचित नही है
आप अपनी जगह सही हो सकते है कि 25 कि उम्र में रिटायरमेंट के बारे में तो 50 के बाद सोचना चाहिए | पर आप शायद जानते ही होंगे कि अगर आप अपने रिटायर्मेंट के लिए जितना देर से बचत करेंगे आपको उतना ही ज्यादा पैसा बचाना होगा | कंही आप 45 पार कर गए है तो आपको अपने रिटायर्मेंट के लिए सिर्फ समझोता ही करना पड़ेगा |
25 में शुरू करने का मतलब है कि आपको बेहद कम निवेश में रिटायर्मेंट के लिए एक बहुत बड़ी निवेश राशि | आइये एक केस स्टडी से समझते है :-
यहाँ हम ये मान कर चल रहे है कि आपको रिटायमेंट पर 1 करोड़ रु कि जरूरत है, और आपको आपके निवेश पर 14% का रिटर्न मिल रहा है |
अगर आप इस रिटायर्मेंट के लिए 25 साल कि आयु में शुरूआत करते है और 60 साल कि आयु में रिटायर होना चाहते है तो आपको सालाना लगभग 13000 का निवेश करना होगा | साल दर साल आपकी आय तो बढती जाएगी पर आपकी निवेश राशि उतनी है रहेगी |
अगर आप इस रिटायर्मेंट के लिए 35 साल कि आयु में शुरूआत करते है और 60 साल कि आयु में रिटायर होना चाहते है तो आपको सालाना लगभग 50000 का निवेश करना होगा | साल दर साल आपकी आय तो बढती जाएगी पर आपकी निवेश राशि उतनी है रहेगी | दस साल का विलंभ और निवेश 3 गुने से भी ज्यादा हो जायेगा |
आइये देखते है कि अगर 10 और साल के विलंभ से शुरूआत कि जाये तो निवेश कि राशि लगभग 200000 करना होगा | साल दर साल आपकी आय तो बढती जाएगी पर आपकी निवेश राशि उतनी है रहेगी |
तो आप किस श्रेणी में आना चाहते है ?
निवेश मिथक पिछले रिटर्न्स आगे के रिटर्न्स की गारंटी होते है
जिस फण्ड या निवेश ने पिछले सालो में रिटर्न दिया है तो आगे के सालो में भी रिटर्न मिलेगा ही मिलेगा | हाँ पिछले साल में अच्छा रिटर्न ये जरूरी बताटा है कि फण्ड अच्छा है, फण्ड मेनेजर बहुत अनुभवी है और बाज़ार कि अच्छी समझ है | इससे ये तो पता लगता है कि ये आगे भी अच्छा रिटर्न दे सकता है इसकी सम्भावना है गारंटी नहीं |
ऐसा इसलिए क्योकि ये जरूरी नहीं कि आगे भी वैसी ही परिस्थियां वैसी ही रहेंगी जैसी पाहिले थीं | निवेश करते समय अपने केवल इस आधार पर निर्णय न लेकर बाकि सभी पहलू भी अच्छी तरह समझ ले |
निवेश मिथक बचत से काम चल जाएगा
बचत कभी भी बुरी नहीं है | पर ये बचत अगर वक्त पर पूरी न पड़े तो …. ऐसी बचत किस काम की | हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि समय के साथ रु की कीमत कम होती जाती है | तो कितनी बचत कि जाये ये कैसे जाना जाये ? इसको जानने का सही तरीका है कि अगर आज ये काम किया जाये तो कितना पैसा लगेगा | अब ये देखिये कि महगाई कितनी चल रही है, और तीसरी बात ये कि आपको इस पैसे कि जरूरत कितने साल बाद होगी |
एक बार जब आप ये निकल ले तब ये देखिये कि इतने पैसे पाने के लिए आपको कितना पैसा सालाना बचाना होगा कि जरूरत की राशि आपको मिल जाये | बचत इस हिसाब से करेंगे तो बेहतर होगा |
और जानने के लिए यहाँ क्लिक करिए
निवेश मिथक निवेश के लिए बहुत सारा पैसा चाहिए
जिन्हें निवेश करना है और उन्होंने कभी निवेश नहीं किया है उन्हें लगता है कि निवेश बहुत ज्यादा पैसा होने पर ही शुरू किया जा सकता है । ये गलत है । सच ये है कि निवेश में धनराशि का काम बल्कि अनुशासन का महत्व ज्यादा होता है । आइये एक उदाहरण से समझने का प्रयास करते है ।
आप अपनी सुविधानुसार निवेश की राशि का चुनाव कर सकते है । म्यूच्यूअल फंड म ये राशि 500 रु मासिक जितनी काम हो सकती है । और FD / RD / जीवन बीमा (यहां हैम केवल शुरुआती निवेश राशि की बात कर रहे है) जैसे बहुत सारे निवेश ऐसे है जिनकी शुरूआत आप बहुत कम राशि से कर सकते है ।
तो मन से ये भ्रम निकाल दीजिये । बचत न करने से थोड़ी बचत से शुरुआत कर लेना ज्यादा समझदारी भर फैसला है । मैंने एक ब्लॉग लिखा है कि दिखने में काम लगने वाला निवेश अगर अनुशासन से किया जाता रहे तो कैसे आपको बहुत बड़ी राशि मे बदल जाता है ।
इस ब्लॉग को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करिये
निवेश मिथक पुराना तरीका ही सही है
जी अगर आपको लगता है कि पुराना तरीका सही है तो आप पूरी तरह से न तो सही है और न ही गलत । पुराने तरीके उस समय उपलब्ध तरीको के हिसाब से बहुत बहुत बेहतर थे, पर बदलते समय के हिसाब से उनकी प्रासंगिकता अब कम हो गयी है । अब नई जरूरतों के हिसाब से नई तकनीकि के हिसाब से नए संसाधनों के हिसाब से बहुत सारे नए निवेश विकल्प उभर कर आये है ।
हमे इन्हें ही देखने, समझने, और अपनाने के लिए भी अपना मानस खुला रखना चाहिए ।
70 से 80 साल पहिले आपके दादा जी के समय मे मोटा खाना () मोटा पहिनना () अच्छा मन जाता था । पर आज हम न तो मोटा खाते है और न ही मोटा पहिनते है। क्या कारण है इसका बस हमने समय के साथ खुद को बदल लिया । तो निवेश के लिए भी क्यो न बदल लें स्वयं को पहिले केवल सोने में निवेश से बीमा म्यूच्यूअल फण्ड स्टॉक MCX जैसे निवेश की तरफ क्यो न बढ़ा जाए ।
निवेश मिथक निवेश के बारे में समझना मुश्किल होता है
निवेश के बारे में समझना बिलकुल सरल है | फिर आपको कठिन क्यों लगता है? क्योकि आप इसे समझने के लिए जितना समय देना होता है उतना समय व्यस्त होने के कारण नहीं दे पाते |
उपाय क्या है ? बस आप निवेश के बारे में पढ़ते रहिये, धीरे धीरे सब समझ में आने लगेगा |
कुछ और उधाहरण
मैं निवेश की सलाह देने के लिए बहुत लोंगों से मिलता रहता हूँ | इसी सिलसिले में मैं हाल ही में एक बड़े सर्राफा व्यापारी के संपर्क में आया था | मैंने उन्हें उनकी पसंद/ जरूरत के हिसाब से एक निवेश उत्पाद सुझाया जो उन्हें काफी पसंद भी आया, वो मुझसे बोले कि आपकी योजना बहुत अच्छी है पर … पर चूंकि आज बुधवार है इस लिए आप कल आ कर चेक और डाक्यूमेंट्स ले लीजिये |
मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की पर सब व्यर्थ गया, सेठ जी ने एक न सुनी, मैंने उन्हें बताने की कोशिश की कि आज ये योजना बंद हो रही है और कल से आपको इस पर 1% कम ब्याज मिलेगा वो भी अगले पूरे टर्म के लिए ……….पर सेठ जी की जिद के आगे मेरी एक न चली | ये 31जुलाई की बात है |
मुझे ये जान कर बड़ा आश्चर्य हुआ कि निवेश जैसे मुद्दे पर भी लोग कैसे मिथक से ही फैसला लेते है | तो मैंने सोचा कि क्यों न इस बात को आप लोगों से साझा किया जाये |
Investment Myths निवेश मिथक 1 आज सोमवार है इस लिए निवेश नहीं करेंगे ?
कुछ लोग निवेश करने से पाहिले कैलंडर देख कर निवेश करने का फैसला लेते है | कुछ और लोग है जो निवेश करने के पहिले गट फील के आधार पर फैसला लेने से नहीं हिचकिचते | मैंने कुछ लोगो को ये भी कहते सुना है कि वो निवेश तो कर देंगे लेकिंन बस इसकी सलाह उस वाले टीवी चैनल पर होनी चाहिए … वगैरा बगैर |
मैं आज तक समझ ही नहीं पाया कि इस तरह से फैसला लेने वाले निवेशक कैसे उन बातो के आधार पर निवेश का फैसला ले लेते है, जिनका निवेश से कोई लेनादेना ही नहीं है| और कैसे ये लोग अपनी मेहनत की कमाई के साथ खिलवाड़ करते है |
सच्चाई —निवेश एक फैक्ट और बाजार / योजना के तथ्यों पर आधरित होता है न कि मिथकों पर |
Investment Myths निवेश मिथक 2
अभी सोने के भाव बढ़ रहे है तो शेयर बाजार धडाम से गिरेगा ? देखिये ये बात किसी हद तक सही है कि बड़े निवेशक जब शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव महसूस करते है तो वो भी अपना पैसा शेयर बाजार से निकल लेते है और इसे सोने या दूसरे मेटल में निवेश कर देते है, इस कारण सोने के भाव में वृद्धि होती है | जब तक शेयर बाज़ार इस उठा पटक से उबरता है तब तक सोने में खरीददारी के कारण भाव में वृद्धि होती रहती है |जैसे ही शेयर बाज़ार पुनः स्थिर होता है तो निवेशक फिर सोने से पैसे निकालने लगते है, और इसे फिर शेयर बाजार में लगाने लगते है | ये एक सामान्य का क्रम है | पर कई बार ऐसा भी हुआ है, जब किसी एक साल या समय में सोना और शेयर बाजार दोनों ने ही एक साथ ग्रोथ दर्ज की है 1993 में ऐसा हुआ था, और ऐसा ही सन 2000 में भी देखा गया |
सच्चाई — सोने और शेयरों में निवेश सोच समझ कर बाँट कर, कर सकते है इससे निवेश डाइवरसीफाईड हो जाता है और आप किसी बड़ी गिरावट से बच सकते है |
Investment Myths निवेश मिथक 3
मैं तो केवल FD में ही इन्वेस्ट करता हूँ | सही है FD एक अच्छा निवेश का विकल्प है… लेकिन छोटी अवधि के लिए, लम्बी अवधि के लिए नहीं | FD का सही प्रयोग ये है कि अगर आपको अपना पैसा प्रयोग करने से पहिले कुछ महीनो के लिए एक जगह रोकना हो तो आप इसे बिना किसी जोखिम के कुछ ब्याज भी कमा सकते है | पर अगर आप 10 या उससे ज्यादा सालो के लिए अपने पैसे का निवेश करते है तो FD इसके लिए बिलकुल भी सही नहीं है | आपको इसके लिए उपलब्ध दूसरे विक्लपो का चयन करना चाहिए जो आपको FD की तुलना में कही ज्यादा आय दे सकते है और अवधि लम्बी होने के कारण जोखिम भी कम हो जाता है |जैसे म्यूच्यूअल फण्ड
सच्चाई — केवल एक साल तक के लिए पैसा रोकना हो तो FD ठीक है अन्यथा किसी दूसरे निवेश विकल्प का प्रयोग करना चाहिए |बाजार में ऐसे बहुत सारे विकल्प उपलब्ध है |
Investment Myths निवेश मिथक 4
मेरे पास प्रोपर्टी / फ़्लैट है फिर चाइल्ड प्लान किस लिए लूं | देखिये अगर ये प्रोपर्टी आप जिस में रह रहे है उससे अलग है तो कुछ हद तक सही है, पर फिर भी इसके अपने पहलू है | फ़्लैट को जरूरत के समय बेचना आसान नहीं होता क्योंकि इसकी कीमत ज्यादा होती है, इस लिए ऐसे में ग्राहकों का मिलना आसन नहीं होता | और इसकी कीमत भी बाज़ार के हिसाब से, और बेचने वाले या खरीदने वाले की गरज / जरूरत पर भी निर्भर करती है | मान लीजिये कि आपको अपनी बेटी की शादी के लिए एक सुयोग्य वर मिल गया है, और आपने मंगनी भी कर दी है | अब आप अपना फ़्लैट बेचना चाहते है आपके पास 3 महीने का समय है | अब तक 75 दिन निकल चुके हो, तो आप प्रेशर में आने लगेगे जिसके कारण आप अपना फ़्लैट कम पैसे में बेचने में मजबूर होगे, और बाज़ार से कम कीमत मिलेगी आपको आपके फ़्लैट की |
सच्चाई — आप अपनी जिम्बेदारी को पूरा करने के लिए किये गए निवेश को कभी भी एक जगह न लगाइए डाईवरसीफाईड करिए | और प्रोपर्टी की जगह म्यूच्यूअल फण्ड एक से ज्यादा तरह के इक्विटी फण्ड या विभिन्न कंपनियों के चाइल्ड प्लान में से किसी का चयन कर सकते है |
पैसा आपका है मेहनत से कमाया हुआ है | इसका निवेश करते समय सजग रहिये और सोच समझ कर ही निवेश करने का फैसला कीजिये, मिथकों के बचिए |
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अगर आप भी इस तरह के किसी मिथक का प्रयौग करते है तो कमेंट करके जरूर बताइए ….
हमें आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहता है कमेंट में जरूर लिखिए |

